इन बातों को जानकार आप भी घर पर ही कम्पोस्ट बनाना सीखें | Composting in Hindi

क्या आप भी इस कीमती चीज को रोज़ कूड़े में फेंक देते हैं , दोस्तों मै बात कर रहा हु घर से निकलने वाले उस कचरे की जिसका इस्तेमाल आप कम्पोस्ट Compost बनाने में कर सकते है । आज हम यही जानेंगे कि कम्पोस्ट क्या है और इसे घर पर ही कैसे तैयार किया जाता है composting in hindi

चलिये इसके पहले देश में कचरे और उसमें हमारे योगदान पर थोड़ा नज़र दौड़ा लेते हैं । आप India’s Mount Averest of Garbage सर्च कीजिये इन्टरनेट पर आपको आइडिया लग जाएगा । दिल्ली में स्थित लगभग 200 फीट ऊंचा ये कूड़े का पहाड़ देश की इस समस्या का प्रतीक चिन्ह है ।

हमारे देश में रोज़ लगभग 1.5 लाख मीट्रिक टन यानि 15 करोड़ किलोग्राम कचरा निकलता है जिसमें से 80% का निस्तारण नहीं हो पता है , वह सड़कों पर या डम्पिंग एरिया में सालों तक पड़ा रहता है और पहाड़ सा बनता रहता है ।

Source : swachchindia.ndtv.com

कहते हैं बूंद-बूंद से घड़ा भरता है, यदि हम अपने स्तर से अपने घर से इस समस्या का हल करना शुरू करते है तो हो सकता है एक दिन ये कूड़े के पहाड़ खतम हो जाएँ और हमारी अगली पीढ़ियों के ये पहाड़ न देखने को मिले । एक अनुमान के अनुसार हर परिवार साल के लगभग 400-500 किलोग्राम कचरा नदी नालों मे जाने से बचा सकता है अगर वह कचरे से कम्पोस्ट बनाना सीख ले ।

कम्पोस्ट क्या है What is Composting  

ऑर्गैनिक पदार्थों या खाद्य पदार्थों के Decomposed होने की प्रक्रिया को Composting कहते हैं । आसान भाषा में कहें तो इसमें सूक्ष्म जीवों द्वारा हवा और पानी की मदद से इन पदार्थों को विघटित करके का खाद में बदल दिया जाता है जो पौधों के लिए बहुत लाभकारी होता है ।

इस प्रक्रिया में सूक्ष्मजीवों के साथ ही केंचुए तथा Maggots जैसे Worms इन ऑर्गैनिक पदार्थों को खाकर पचाकर विघटित कर देते हैं जो Compost रूप में हमें प्राप्त होता है ।

प्रकृति में यह प्रक्रिया अपने आप भी चलती रहती है जैसे जंगलों या पार्कों आदि में जहां पत्तियाँ , फल ,फूल इत्यादि जमीन पर काफी समय तक पड़े रहते है तो वो Decompose होते रहते हैं तथा मिट्टी के ऊपर एक परत बना लेती है जिसे Humus कहते हैं ,ये नेचुरल Soil Conditioner के रूप में काम करते हैं ।

जंगल मे फैली Humus की परत , Soil Conditioner

घर के किचन से निकले गीले कूड़े-कचरे से इसी Composting प्रक्रिया द्वारा हम घर पर ही Compost प्राप्त कर सकते हैं , जो हमारे पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को बिलकुल Free हमें दिला सकता है । इसके फ़ायदों को देखते हुये अब इसे Black Gold भी कहा जाने लगा है ।

Compost के फायदे

कोंपोस्ट पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं , पूरी तरह से प्राकृतिक और बिना रसायन के होने के कारण यह घर में लगे पौधों और खेतों आदि के लिए सर्वोत्तम है ।

कम्पोस्ट में नाइट्रोजन सबसे महत्वपूर्ण अवयव है ,जोकि पौधों के पोषक तत्वों में से सबसे महत्वपूर्ण तत्वों NPK का प्रमुख भाग है । कम्पोस्ट में कार्बन और नाइट्रोजन का अनुपान 10:01 का होता है ।

चूंकि इसमें विभिन्न तरह का खाद्य पदार्थ प्रयोग में आता है इसलिए उनमें पाये जाने वाले पोषक तत्व भी अच्छे से आ जाते हैं , जैसे केले के छिलके से फास्फोरस , प्याज़ से सल्फर , अंडे के खोल से कैल्शियम आसानी से कम्पोस्ट में मिल जाता है । 

Composting का डबल फायदा यह है कि घर से निकालने वाले कूड़े कचरे को नालियों में , नदियों में जाने से बचाता है जिससे प्रदूषण कम होता है और साथ ही Free में पौधों के लिए इतनी उच्च Quality का खाद आसानी से मिल जाता है ।

अगर आपके घर में कम पौधे हैं या पौधे नहीं है तो भी आप कम्पोस्ट बनाकर किसी को गिफ्ट कर सकते हैं या पास के किसी Garden में डाल सकते हैं ।Gardening करने के 10 बेहतरीन फायदे  

घर पर Compost बनाने के लिए आवश्यक वस्तुएं

कम्पोस्ट बिन Compost Bin

जिस पात्र में हम Composting की प्रक्रिया करेंगे उसे Compost Bin कहते हैं। वैसे तो Online Compost Bin कई तरह के मिलते हैं पर शुरुआत में आप घर पर ही माजूद कुछ समान को Compost Bin में बादल सकते हैं ।

पेंट की बाल्टी , नहाने वाली बाल्टी , मिट्टी या सीमेंट के गमले या फिर मटकों या घड़ों का इस्तेमाल Compost बनाने के लिए किया जा सकता है , मै भी मिट्टी के 18 इंच वाले गमलों का प्रयोग करता हु तथा 9 इंच के प्लास्टिक गमले में भी प्रयोग किया है । मिट्टी के गमले Best रहेगा वैसे। इसमें नीचे Holes के साथ साथ Sides में भी कई Hole कर दें ताकि हवा Oxygen का प्रवाह बना रहे ।

यदि आपके पास खुली जगह या मैदान है तो आप बड़ा गड्ढा बना सकते है जो 3 x 3 x 3 फीट साइज़ का हो सकता है ,जिसे Compost Pit कहते हैं , इसके अलावा लकड़ी के पटरों का भी जालीदार बिन बना सकते हैं ।

फार्म पर बना लकड़ी के पटरों से कम्पोस्ट फ्रेम / बिन

इन Compost Bin या Pit को ढकने के लिए एक ढक्कन या प्लास्टिक कवर का इंतेज़ाम करना होगा ताकि अनावश्यक बारिश का पानी इसमें न जाए ।

गीला कचरा (नाइट्रोजन) Green Material 

किचन से निकला गीला कचरा जिसमें फल सब्जी का छिलका आदि , चायपत्ती, अंडे का खोल Egg Shell,बचा हुआ भोजन आदि शामिल होता है , अगर ध्यान से आप देखें तो यही पदार्थ सड़कों आदि में भी पड़ा रहता है जो हमारे घरों से ही निकलता है । इन पदार्थों से ही नाइट्रोजन का विघटन होता है ।

किचन से निकला गीला कचरा , Green / Nitrogen Material

सूखा कचरा (कार्बन) Brown Material 

सूखी पट्टियाँ , सूखी घास , Wood Chips ,कागज के टुकड़े  , अखबार के छोटे टुकड़े  , गत्ते Cardboard के टुकड़े आदि कार्बन के स्रोत हैं । गीला कचरा 1 भाग तथा सूखा कचरा 2 भाग (1:2) रहना चाहिए पूरे Compost Bin में

सूखा कचरा Brown / Corbon Material

कम्पोस्ट या मिट्टी 

अगर आपके पास पहले से खरीदा हुआ कुछ कम्पोस्ट है तो यह इसमें काम आ जाएगा यदि नहीं है तो कुछ गमलों से मिट्टी इकठ्ठा कर लीजिये ।

सूक्ष्म जीव

इन पदार्थों को Decompose करने का कार्य सूक्ष्म जीव या कीड़े करते हैं , पत्तियां, कचरा  आदि डालने केकुछ दिनों के बाद Compost Bin में ये जीव अपने आप पैदा हो जाते हैं । व्यावसायिक रूप से Compost के निर्माण में खास तरह के केंचुए का इस्तेमाल किया जाता है जिन्हें खरीद कर लाया जाता है ।  

एक अलग स्थान

अगर आपके पास खुली जगह या छत है तब आपको ज्यादा दिक्कत नही होगी । यदि आप फ्लैट में रहते है तो बालकनी में एक कोना आपको सर्च करना होगा , जहां आपका Compost Bin किनारे पड़ा रहे तथा जहां आप आसानी से इसमें कचरा डाल भी सकें तथा इसकी नियमित निगरानी कर सकें । 

क्या नहीं डालना है 

प्लास्टिक/ फाइबर का कोई भी समान , मांस-मछ्ली , तेल , Chemicals , बीमार पौधों की पत्तियां , जानवरों का मल आदि बिल्कुल नहीं डालना है । डेयरी प्रोडक्टस भी न डालें, ज़्यादातर विशेषज्ञ इसे मना करते हैं ।

घर पर कम्पोस्ट कैसे बनाए

इसको बनाने के लिए आपको तीन लेयर या स्तर बनाना होगा आइये इनको पहले समझ लेते हैं –

पहला लेयर – गमले के सबसे नीचे कुछ कंकड़ डाल दें फिर कुछ अखबार के छोटे छोटे टुकड़े फैला दें इस पर । इस पर कुछ सूखी घास या पत्तियां डाल Brown Material दें , यदि इन्हें भी छोटे छोटे टुकड़ों में कर लेंगे तो Decompose होने में कम समय लगता है ।

दूसरा लेयर – इसमें किचन से निकला गीला कचरा Green Material डाल दीजिये । आपको यह ध्यान रखना है कि Brown Material 2 भाग यानि 66 % के आसपास रहना चाहिए , क्यू रहना चाहिए ये आगे बताते हैं ।

तीसरा लेयर – एक बार फिरसे Brown Material कि लेयर बना ड़े Green के ऊपर फिर कुछ कम्पोस्ट या मिट्टी डाल कर धक दें ।

इसके बाद यही प्रक्रिया Compost Bin के साइज़ के अनुसार फिर से कर सकते हैं । अंत में कुछ (2-3 कप मात्र) पानी डाल देंगे। Bin के नीचे एक ट्रे रख दें तो सही रहेगा यहाँ से निकलने वाला तरल पदार्थ एक अच्छा Fertiliser होगा उसे आप Use कर सकते हैं । पर हमें पानी की मात्रा सीमित रखनी है एक बार Bin भर जाने के बाद उसमें पानी डालने कि आवश्यकता नहीं रहती है ।

कितने दिन में तैयार होगा – कई जगह पर 30 दिन का भी दावा किया जाता है पर अच्छा कम्पोस्ट के लिए 60 से 70 दिन का समय लग सकता है जबकि आपने प्रक्रिया सही से अपनाई हो जैसा कि यहाँ बताया गया है ।

50 दिन बाद आप किसी खुरपी या किसी लोहे कि छड़ से थोड़ा नीचे हटा कर देख सकते है कि क्या स्थिति है । यदि Mixture सूखा, भूरा और बिना बदबू का लग रहा तो आपका Compost तैयार हो गया है ।

Compost बनाने में आने वाली समस्या

बदबू का आना Stinky Compost 

यदि आपके Compost Bin से बहुत तीव्र गंध आ रही है तो संभवतः यह अमोनिया की गंध होगी । इसका कारण यह हो सकता है कि आपने Green Material का अनुपात या मात्रा ज्यादा कर दिया होगा जिसे 30 से 40 % से ज्यादा नहीं होना चाहिए ।

इसके अतिरिक्त पानी की मात्रा ज्यादा होने पर कम्पोस्ट Soggy हो जाता है , इसलिए यह ध्यान रखना होगा कि इसमें ज्यादा पानी नहीं देना है तथा बारिश के पानी से भी बचाना है । पूरे कम्पोस्ट बिन के भर जाने के बाद उसे पुराने कम्पोस्ट या मिट्टी की एक मोटी लेयर से ढकना बहुत जरूरी है ।

कई लोग कि यहा समस्या रहती है सूखा कचरा Brown Material कहाँ से लाएँ क्यूंकी किचन से ही ज्यादा कचरा निकलता है और उसमें ज़्यादातर गीला कचरा होता है ।इसके लिए आपको थोड़ा दिमाग लगाना होगा ।

अपने घर में दो Dust Bin रखिए जैसा आजकल नगर पालिका वाले हर जगह लगाए रखते है ।एक में गीला कचरा डालिए तथा एक में आप सूखी पत्तियां , प्याज़-लहसुन का छिलका , किचन से निकले कुछ पदार्थों को आप धूप में सूखा भी सकते हैं जैसे केले सेब के छिलके आदि।  

Bugs/Worms का ज्यादा होना 

कम्पोस्ट बनने कि प्रक्रिया में Bugs का होना सामान्य है पर इनकी संख्या अगर ज्यादा है तो आपको दिक्कत हो सकती है वो भी जब आप ने इसे बालकनी के आसपास रखा हो । क्रीम या भूरे रंग के Bugs जोकि एक परकर के लार्वा होते हैं इन्हें Maggots कहा जाता है , ये Compost के लिए अच्छे होते है यह Decomposition की प्रक्रिया को कई गुना तेज़ कर देते है ।

इनकी संख्या ज्यादा होने पर आपको ये कम्पोस्ट के बाहर भी दिख सकते हैं इसके लिए आप कम्पोस्ट में Brown Material अच्छी मात्रा में मिला दें ताकि कार्बन और नाइट्रोजन का अनुपान Balance हो जाए ।

कंपोस्टिंग मंद गति से होना Slow Composting 

कभी कभी गर्मी के मौसम में कम्पोस्ट बिन बिल्कुल सूखा रह जाता है जिससे कंपोस्टिंग की प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है । ज्यादा गर्मी मे यदि आपको लगे आपका कम्पोस्ट बहुत सूखा है तो उसमें कुछ पानी छिड़क दिया करें तथा ऊपर से इसे ढकना न भूले ताकि कुछ नमी वाष्प से भी बनती रहे ।

Composting के Tips

कार्बन-नाइट्रोजन – हमेशा कार्बन और नाइट्रोजन Material का अनुपात 2 : 1 रखें इससे आगे दिक्कत नहीं आएगी ।

धूप मे सुखाना – कम्पोस्ट बनने के बाद इससे धूप में सूखा लें ताकि Bugs मर जाए या चिड़ियाँ और चीटियाँ उन्हें खा लें ।

छानना – Garden में प्रयोग करने के पहले इसे छानना अच्छा रहेगा , बचे हुये भाग को नए कम्पोस्ट के लिए बचा के रख लीजिये

आपको यह जानकारी कैसी लगी हमे कमेन्ट करके जरूर बताएं , और नीचे दिये गए like बटन को जरूर दबाएँ , ऐसे ही पेड़-पौधों और गार्डेन से जुड़ी रोचक और उपयोगी जानकारी के लिए hindigarden.com से जुड़े रहें , धन्यवाद ।

Happy Gardening..

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