अपराजिता बेल कैसे लगाएं और उसकी देखभाद कैसे करें? अपराजिता का फूल

अपराजिता या Blue pea जिसे बटरफ्लाई पी के नाम से भी जाना जाता है एक बहुवर्षीय पौधा है । भारत मे इसे काफी पवित्र फूल माना जाता है ,पूजापाठ मे इसका सदियों से इस्तेमाल होता आ रहा है ।

इसके अलावा modern चिकित्सा ,कृषि मे भी इसका महत्व है साथ ही यह एक नेचुरल food colorants तथा antioxidants के रूप मे भी काफी प्रयोग किया जाने लगा है ।

कैसा होता है अपराजिता बेल का पौधा 

अपराजिता एक तरह की बेल होती है जो कि दीवार, ग्रिल या जंगले आदि पर चंढ़ी हुई आपको आसानी से दिखाई दे सकती है। इसे ज्यादातर लोग घरों के मुख्यद्वार की दीवार पर लगाना पसंद करते हैं।

इस बेल की ऊंचाई 5 से 10 फीट तक जा सकती है  जबकि 2 से 3 फीट इस बेल की चौड़ाई होती है।

अपराजिता की बेल को अग्रेजी में Blue Pea, Butterfly Pea, Asian pigeonwings, Darwin Pea, Gokarna आदि नामों से भी जाना जाता है। भारत में सबसे ज्यादा नीले रंग के फूलों वाली अपराजिता को देखा जाता है।

अपराजिता की बेल की मुख्यत: तीन किस्म पाई जाती हैं, जो कि निम्न हैं:-

  • नीले-बैंगनी रंग के फूल वाली अपराजिता बेल।
  • सफेद रंग के फूल वाली अपराजिता बेल।
  • गुलाबी रंग के फूल वाली अपराजिता बेल।

अपराजिता का वानस्पतिक नाम क्या है

इस फूल का वानस्पतिक नाम Clitoria ternatea है , इस नाम के पीछे का रहस्य जानकार आपको थोड़ी हैरानी भी हो सकती है कि कैसे इसका वानस्पतिक नाम यह रखा गया ।

जैसा कि हमे पता है नाम रखने और पौधों के वर्गिकरण की शुरुआत Carl Linnaeus ने की थी , लिनियस ने अपराजिता की जो नमूना प्रयोग किया था वह इन्डोनेशिया के Ternate टापू से लिया था जिससे इसकी species ternatea रखा गया जबकिजीनस clitoria को इस फूल की उस बनावट के कारण रखा गया जिसमे यह स्त्री की योनि clitoris की तरह से दिखती है ।

अपराजिता के पौधे में फूल कब आते हैं 

अपराजिता का पौधा अमूमन गर्मी में मौसम में ज्यादा हरा भरा रहता है। साथ ही इसके पौधे में गर्मी के मौसम में ही फूल खिलते दिखाई देते है। सर्दी के मौसम में इस बेल में फूल नहीं खिलते।

खास बात ये है कि अपराजिता के फूलों में किसी तरह की महक या खाने में स्वाद नहीं होता। हालांकि, देखने में इसका फूल बेहद ही सुंदर और मनमोहक होता है।

कैसे लगाएं अपराजिता का पौधा 

अपराजिता का पौधा दो तरीकों से लगाया जा सकता है। आप इसकी कलम भी लगा सकते हैं। जबकि यदि आप चाहे तो इसका बीज भी खरीदकर आप लगा सकते हैं। हालांकि, यदि आप बीज लगाते हैं, तो इसे पौधा बनने में 5 से 6 महीने लग जाते हैं।

जबकि कलम लगाने पर महज 3 से 4 महीने में ही आपको इसमें फूल देखने को मिल जाते हैं। यहां हम आपको इसे लगाने के दोनों ही तरीकों के बारे में बताने जा रहे हैं।

बीज से कैसे लगाएं अपराजिता का पौधा 

अपराजिता के पौधे को बीज के माध्यम से उगाना चाहते हैं, तो सबसे पहले आप अपने नजदीकी बीज भंडार से इसका बीज खरीद लाइए। बीज खरीदने के बाद आप इसे कुछ घंटे पानी में भिगो दीजिए।

इससे बीच को उगने में आसानी रहेगी। इसके बाद आप इस बीज को भुरभुरी मिट्टी में दो से तीन इंच की दूरी पर 1 इंच जमीन में नीचे दबा दीजिए। कम से कम आप दो बीच तो अवश्य लगाएं।

बाकी आप जगह के हिसाब से भी तय कर सकते हैं। इस बीज को आप गमले या जमीन पर कहीं भी लगा सकते हैं। बीज लगाने के बाद आप इसके ऊपर थोड़ा सा पानी का छिड़काव कर दीजिए।

पानी बस इतना दीजिए कि मिट्टी में नमी बनी रहे। इसके बाद आप देखेंगे कि एक सप्ताह के अंदर वहां बीज से पौधा उगने की शुरूआत हो चुकी है।

कलम काटकर अपराजिता का पौधा कैसे लगाएं 

कलम काटकर अपराजिता का पौधा लगाना सबसे सरल काम है। सबसे पहले आप अपराजिता के किसी बेल से एक ऐसी कलम काट लीजिए, जो ना ज्यादा नर्म हो ना ही ज्यादा सख्त।

इसके बाद आप कलम के पत्तों को तोड़ दीजिए। इसमें केवल ऊपर के हिस्से के दो-तीन पत्ते छोड़ दीजिए। इसके बाद आप इसी कलम को गमले या जमीन जहां भी आप लगाना चाहें वहां मिट्टी में दबा दीजिए।

ध्यान रखें कि मिट्टी में वही हिस्सा दबाना है जिसे आपने बेल से काटा है। इसे मिट्टी में दबाने के बाद आप इसमें थोड़ा पानी का छिड़काव कर दीजिए। पानी कभी भी सीधा मत दीजिए। इससे कलम खराब हो जाएगी।

मौसम के हिसाब से आप इसमें पानी का छिड़काव बस इतना करते रहिए कि मिट्टी सूखे ना। साथ ही आप यदि इस कलम को गमले में लगा रहे हों, तो उसे छांव में रखने की कोशिश करें, ताकि गर्मी की वजह से खराब ना हो।

इसी तरह 12 से 15 दिन बाद आप देखेंगे कि आपकी लगाई कलम से जड़े निकलने लगी है और उसमें और ज्यादा हरियाली दिखाई दे रही है। कलम लगाने के बाद आप यदि इसकी जगह या गमला बदलना चाहते हैं, तो 30 से 40 दिन के अंदर ही बदल लें।

इसके बाद यदि आप इसकी जगह बदलते हैं, तो ये पौधा सूख भी सकती है इसलिए ऐसा कभी ना करें।

मिट्टी कैसे तैयार करें 

मिट्टी तैयार करने से पहले आप अपराजिता के पौधे को लगाने की जगह तय कर लें। यदि आप इसे गमले में लगाना चाहते हैं, तो आसपास किसी नर्सरी से बड़े आकार का गमला खरीद लाएं।

ध्यान रखें कि गमला सीमेंट या मिट्टी का हो तो ज्यादा अच्छा रहेगा और यदि उसमें नीचे छेद ना हो तो नर्सरी से ही छेद भी करवा लें। ताकि पानी की निकासी सही से हो सके ।

इसके बाद आपको सबसे पहले साफ सुथरी मिट्टी लेनी है। अपराजिता के पौधे को किसी भी प्रकार की मिट्टी में उगाया जा सकता है इसलिए आप कोई भी मिट्टी ले सकते है।

मिट्टी लेने के बाद आप इस मिट्टी में थोड़ी मात्रा मे जैविक खाद् और रेत मिला लें। इससे पौधे का विकास ज्यादा तेजी से होगा। इसके बाद आप इस मिट्टी को गमले में डाल सकते है या जिस जगह आप पौधा लगाना चाहते हैं, वहां इस मिट्टी को डाल दीजिए।

बस अब आप इस मिट्टी में अपराजिता की कलम या बीज आसानी से बो सकते हैं।

कैसे करें अपराजिता के पौधे की देखभाल 

  • एक बार यदि आपके घर में अपराजिता का पौधा अच्छी तरह से उग जाता है, तो इसकी कोई विशेष देखभाल करने की जरूरत नहीं पड़ती। बस यदि आप इसके फैलाव को रोकना चाहते हैं, तो समय समय पर नियमित इसकी बेल की कटिंग करते रहे।
  • यदि आपकी बेल लंबी होती जा रही है, तो इसका ऊपरी हिस्सा आप तोड़ भी सकते हैं। इससे अपराजिता की बेल और ज्यादा चौड़ी होगी साथ ही इसमें फूल भी और ज्यादा घने लगने लगेंगे।
  • सूखे फूल और टहनी हमें तुरंत तोड़ देने चाहिए। इनसे पौधे की विकास की गति प्रभावित होती है।
  • अपराजिता का पौधा धूप ज्यादा पसंद करता है। इसलिए इसे धूप में ही उगाएं ताकि इसे सूरज का प्रकाश नियमित मिलता रहे।
  • अपराजिता के पौधे को गर्मी में रोजाना पानी देने की जरूरत होती है। जबकि सर्दी के दिनों में हप्ते में दो से तीन बार पानी देना काफी रहता है। पानी देते हुए और खासतौर पर बरसात के मौसम में हमें विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पानी पौधे की जड़ों में कई दिनों तक ना रूका रहे। इससे पौधे की जड़े सड़ सकती हैं। जो कि पौधे के लिए नुकसानदेह है।
  • यदि आप ज्यादा फूल देखना चाहते हैं, तो अपराजिता के पौधे में महीने में एक बार खाद् डाल सकते हैं। हालांकि, खाद् ना डालने से भी कोई परेशानी नहीं होनी वाली।
  • अपराजिता के पौधे में जल्दी से कोई बीमारी नहीं लगती। केवल जड़ों में पानी रूकने से ही परेशानी होती है। इसलिए इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि पानी कई दिनों तक खड़ा ना रहे। 15 से 20 दिनों के अंतराल पर नीम तेल का छिड़काव कर सकते हैं ।

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Happy Gardening..

writer : Rohit Yadav

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