बरगद के पेड़ से जुड़ी इन बातों को आप नही जानते होंगे | Banyan Tree in Hindi

भारत मे पेड़ों का बहुत महत्व है और इन्हे धर्म और दर्शन से जोड़ कर देखा जाता है । पीपल को हिन्दू और बौद्ध धर्म मे सबसे ज्यादा पवित्र माना जाता है और इसी के साथ बरगद के पेड़ को भी बहुत महत्व दिया जाता है , इसके महत्व को इसी बात से समझा जा सकता है कि बरगद को हमारे देश का राष्ट्रीय वृक्ष का दर्जा दिया गया है ।Banyan Tree in Hindi

बचपन मे जब हम किसी राजकीय या राष्ट्रीय राजमार्ग पर चलते थे तो दोनों तरफ बड़ी मात्रा मे बरगद के पेड़ होते थे जिनकी canopy पूरे सड़क को छायादार बना के रखती थी , कभी कभी तो कुछ सड़क के कुछ भागों मे अंधेरा सा छा जया करता था , अब तो सड़क मार्गों पर से लगभग 95% पुराने वृक्ष काट ही दिये गए हैं ।

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पहले पुरानी मार्गों के दोनों तरफ बरगद के पुराने पेड़ दिखा कराते थे

Kahlil Gibran ने मनुष्य की इसी प्रवृत्ति के बारे मे लिखा है –

Trees are poems that earth writes upon the sky॰ We fell them down and turn them into paper, that we may record our emptiness॰

बरगद का परिचय और इतिहास

बरगद को वट वृक्ष भी कहा जाता है , अङ्ग्रेज़ी मे इसे banyan tree या Indian fig tree कहा जाता है और इसका वानस्पतिक नाम Ficus benghalensis है ।

जीनस ficus के अंतर्गत कई करीब 800 से ज्यादा पेड़-पौधे आते हैं जिनमे पीपल , पाकड़, अंजीर , कटहल , गूलर आदि शामिल हैं ।

बरगद का पेड़ 100 फीट तक ऊंचा जा सकता है जोकि उसके स्थान और उम्र पर निर्भर करता है , इसका फैलाव या canopy भी कई सौ फीट तक फैल सकता है ।

यह पेड़ 300 से 400 वर्ष तक जीवित रह सकता है , यह भी कहा जाता है कि यह प्रलय मे भी नही मरता है , इसका यह अर्थ भी निकाला जा सकता है कि बेहद सूखे या अकाल के समय भी यह हारा भरा बना रहता है । इसी कारण बरगद को अमरत्व से भी जोड़कर देखा जाता है ।

Banyan नाम के पीछे की कहानी

अँग्रेजी मे बरगद को banyan बोला जाता है , ये शब्द पुर्तगालियों द्वारा एशिया मे उनके उपनिवेशिक काल के दौरान दिया गया ।

प्राचीन काल मे पुर्तगाल के उपनिवेश लगभग सभी महाद्वीपों मे फैला था , एशिया मे भी यह अरब देशों से लेकर भारत और पूर्वी एशिया के देशों तक फैला हुआ था ।

उस समय भारत के पूर्वी हिस्सों जैसे गुजरात , सिंध आदि के व्यापारी जिन्हें बनिया भी कहा जाता है वे व्यापार के लिए ईरान तक निकल जया करते थे , आप मैप देखकर यह समझ सकते हैं कि उस समय सड़क मार्ग से सिंध से ईरान जाना एक सामान्य सी बात थी ।

हम थोड़ा इतिहास की तरफ जा रहे पर बात पता करना है तो पूरा ही पता किया जाए , ठीक है न ।ईरान के Gombroon बन्दरगाह जो अभी Bandar-Abbas के नाम से जाना जाता है यहा पर 16वीं शताब्दी मे पुर्तगालियों का शासन था ।

सन 1622 मे पहली बार यह जिक्र किया गया कि Gombroon के पास एक ऐसा पेड़ है जिसके नीचे बनिया (merchants) या हिन्दू व्यापारियों ने छोटा सा पगोडा बना रखा है , यही से इस पेड़ को पुर्तगाली अफसर Banyan Tree कहकर बुलाने लगे ।

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Banyan Tree का विवरण

यहाँ यह भी बताते चले कि यह पेड़ ज़्यादातर भारत , पाकिस्तान, श्रीलंका और अन्य पूर्व एशिया के देशों मे ज्यादा पाये जाते हैं , यूरोप मे यह न के बराबर पाये जाते हैं अन्यथा वो पहले ही इसका नामकरण कर चुके होते ।

भारतीय धर्म और दर्शन मे बरगद का महत्व

यम से नाता

बरगद को यम या यमराज से जुड़ा हुआ माना जाता है , यमराज को मृत्यु का देवता माना जाता है । इसीलिए पहले गाँव मे बरगद को गाँव के बाहर शमशान आदि के पास लगाया जाता था । ऐसा भी माना जाता है कि बरगद के पेड़ पर भूत आदि निवास करते हैं , आज भी लोग गाँव मे रात मे बरगद के पेड़ के नीचे नहीं जाते हैं ।

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अमरत्व का प्रतीक

बरगद को अमरत्व का प्रतीक माना जाता है, ऐसा कहा जाता है कि बरगद प्रलय को भी मात दे सकता है , इसका मतलब यह निकाला जा सकता है कि बरगद का पेड़ काफी कठिन परिस्थितियों या अकाल जैसे हालत मे भी हरभरा बना रह सकता है ।

देवी सावित्री की कहानी तो आपने सुनी ही होगी जिसमे उसके पति की एक बरगद के पेड़ के पास ही मृत्यु हो जाती है , वह उसके पति को ले जा रहे यमराज का पीछा करती है और अपनी जिद और सूजबूझ से अपनी पति के प्राणों को वापस ले आती है ।

इसी घटना को याद करते हुये आज भी हजारों साल से ज्येष्ठ माह मे वट सावित्री व्रत मनाया जाता है जिसमें महिलाएं अपनी परिवार की खुशहली और पति की दीर्घ आयु के लिए बरगद के पेड़ की पूजा करती है और उसे धागा बांधती हैं ।

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ध्यान और सन्यास का प्रतीक

भारतीय दर्शन मे उन सभी चीजों का बहुत महत्व है जिनकी आयु सैकड़ों साल या हजारों साल होती है जैसे वृक्ष , नदियां , भूमि , पर्वत , समुद्र आदि । इन सभी को स्थिरता , ध्यान और आध्यात्म से जोड़कर देखा जाता है ।

शिव भगवान भी जिनको सबसे बड़ा योगी और सन्यासी माना जाता है बरगद के पेड़ के नीचे ही ध्यान लगते थे ।

बागवानी मे महत्व

जड़ों या जटाओ की जटिल संरचना और बड़ी संख्या मे शाखाएँ निकलने की वजह से banyan tree को बागवानी की दो पद्धतियो Bonsai और Penjing के लिए यह एक आदर्श पौधा है । आपको जानकार आश्चर्य होगा की ताइवान की एक फॅमिली अपनी कई पीढ़ियों से बोन्साई पौधों का रख रखाव कर रही है और उनके पास करीब 250 साल पुराना बरगद का बोन्साई आज भी मौजूद है ।

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बरगद का bonsai

चिकित्सा मे उपयोग

बरगद के सभी हिस्सों का आयुर्वेद मे अत्यधिक औषधीय उपयोग बताया गया है जोकि महिला , पुरुष , बच्चो , बुजुर्ग आदि को विभिन्न रोगों मे बहुत लाभ पहुंचा सकता है , पर जानकारी के अभाव मे हम सभी इस वृक्ष को अनदेखा कर देते हैं । आइये बरगद से होने वाले लाभों के बारे मे जानकारी ली जाए –

बरगद के पत्ते से उपचार

बरगद के पत्ते से बालों कि समस्या का इलाज संभव है , इसके अलावा खूनी पित्त, त्वचा रोग मे , जुकाम व नजला , दस्त व पेचिश , खूनी बवासीर , मधुमेह , मासिक धर्म विकार व महिलाओं से संबन्धित अन्य रोगों मे , शरीर कि कमजोरी दूर करने , अनिद्रा मे ,घाव का इलाज मे , रसौली मे , आग से जलने पर , खुजली के इलाज मे बरगद की पत्ती का इस्तेमाल करके कारगर इलाज किया जा सकता है ।

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बरगद की पत्तियाँ

बरगद की जटा से उपचार

बरगद की जटा से गंजेपन की समस्या , मधुमेह , मूत्र रोग मे , मासिक धर्म विकार में, सिफ़लिस , स्तनों का ढीलापन , सुजाक रोग मे बरगद की जटा या जड़ का उपयोग किया जटा है ।

बरगद के छाल से उपचार

नाक से खून आने , दांत रोगों मे ,दस्त , बवासीर , मधुमेह, Gonorrhea , गर्भधारण समस्या मे , याददाश्त बढ़ाने मे  बरगद के छाल का बहुत ही असरदार लाभ पाया गया है ।

बरगद के दूध से उपचार

नेत्र रोग मे , कान से जुड़े रोगों मे , दांत रोगों मे , टांसिल दर्द मे , दस्त मे , मधुमेह , कमर दर्द मे , घाव के इलाज में , कुष्ठ रोग में , बरगद के पत्तियों , टहनियों से निकलने वाला दूध बहुत लाभकारी होता है ।

बरगद की टहनी से आप दातून भी कर सकते हैं , इसके अलावा इससे मिलने वाला फल भी अत्यधिक लाभकारी होता है ।

नोट: आचार्या श्री बालकृष्ण द्वारा बताए गए तरीकों से आप बरगद का इन रोगों मे सही से उपयोग करना सीख सकते हैं ।

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बरगद की जटिल दूर तक फैली जड़ें

एतिहासिक और चर्चित बरगद

Thimmamma Marimanu

आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले मे स्थित लगभग 550 साल पुराना बरगद का पेड़ जिसकी canopy या ऊपरी हिस्से का फैलाव लगभग 19200 वर्ग मीटर है जोकि एक औसत क्रिकेट फील्ड से भी ज्यादा है । इसी विशालता के कारण इसको 1989 मे Guinness Book of World Records मे शामिल किया गया ।

The Great Banyan Tree

कलकत्ता मे आचार्या जगदीश चन्द्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान हावड़ा मे लगभग 250 साल पुराना बरगद का पेड़ है ,यानि जब प्लासी का युद्ध हुआ था उसे आसपास यह पेड़ बनना शुरू हुआ था । पेड़ द्वारा कवर किया गया क्षेत्र लगभग 18000 वर्ग मीटर से भी ज्यादा का है ।

1864 और 1867 मे आए भयंकर तूफान के कारण इसके मुख्य तने को काफी क्षति पहुंची जिसको 1925 मे काटकर हटाना पड़ा ताकि संक्रमण पूरे पेड़ तक न पहुँच सके , आज जो विशालकाय बरगद का पेड़ है यह उसी तने से निकले जटाओं के जमीन से नए पेड़ बनने के कारण बना है ।

Dodda Aalada Mara

डोड्डा आलदा मारा जिसका मतलब है big banyan tree , लगभग 400 साल पुराना पेड़ है जोकि बंगलोर से 28 किलोमीटर दूर एक गाव मे स्थित है । यह कुल 12000 वर्ग मीटर के दायरे मे फैला हुआ है जो लगभग 2 फूटबल फील्ड के बराबर होता है ।

Iolani Palace Banyan Trees

हवाई द्वीप अमरीका का हिस्सा होने के पहले एक राजशाही के धीं था वही की राजकुमारी Kapiolani ने सन 1880 मे Iolani Palace मे 2 बरगद के पेड़ लगाए थे जो आज बहुत विशालकाय बरगद का पेड़ बन चुका है ।

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Kalpabat Jagannath Temple

पूरी स्थित जगन्नाथ मंदिर के अंदर एक प्राचीन वटवृक्ष है जिसे कल्प बट कहा जाता है इसे श्रद्धालुओ द्वारा बहुत पवित्र माना जाता है । ऐसा माना जाता है कि इस वट की आयु 500 वर्ष से भी ज्यादा है ।

Florida Banyan

फ्लोरीडा के एक थीम पार्क LEGOLAND Florida मे 1939 मे एक बाल्टी मे लगाया गया बरगद का पेड़ अपनी शानदार आकार की वजह से आज वहाँ का मुख्य आकर्षण का केंद्र बन चुका है ।

Pillalamari

तेलंगाना के महबूबनगर मे स्थित यह बरगद का पेड़ 800 साल पुराना माना जाता है । Pillalamari का मतलब बच्चो का बरगद होता है , इसके अलावा इसे Peerlamarri यानि संतों का बरगद भी कहा जाता है ।

Kabirvad Gujrat

गुजरात के भरूच जिले मे कबीरवड नाम से विख्यात एक बेहद पुराना बरगद का पेड़ है जोकि संत कबीर से जुड़ा हुआ है । कहते है इस गाव के दो ब्राह्मण भाइयों ने एक बरगद की एक सूखी टहनी अपने घर के आँगन मे लगाया और उस पर संत कबीर के चरणों के जल को उस पर डाला जिससे वह टहनी हरीभरी हो गई , यही पौधा बाद मे कबीरवड के नाम से जाना गया , इसकी उम्र 500 साल से भी ज्यादा मानी जाती है ।

आपको यह जानकारी कैसी लगी हमे कमेन्ट करके जरूर बताएं ।पेड़ पौधो के बारे मे ऐसी ही कई रोचक और उपयोगी जानकारी के लिए hindigarden से जुड़े रहिए ।

Happy Gardening

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